संकष्टी चतुर्थी: सम्पूर्ण गाइड

संकष्टी चतुर्थी: सम्पूर्ण गाइड
संकष्टी चतुर्थी — सम्पूर्ण गाइड
मासिक एवरग्रीन · गणेश व्रत गाइड

संकष्टी चतुर्थी: सम्पूर्ण गाइड

गणेश पूजा · उपवास नियम · चंद्र दर्शन · 2026 तिथियाँ

कोई नया काम शुरू करना हो। किसी मुश्किल से बाहर निकलना हो। या बस इतना — कि ज़िंदगी में थोड़ी शांति और स्पष्टता आ जाए। हिंदुओं के घर में पहला नाम जो लिया जाता है — गणेश जी का।

संकष्टी का अर्थ है "मुश्किलों से मुक्ति।" हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत मनाया जाता है — पूर्णतः भगवान गणेश को समर्पित।

संकष्टी चतुर्थी 2026 — सभी तिथियाँ

महीनासंकष्टी का नामतिथि
जनवरीसकट चौथ / तिलकुटा चतुर्थी17 जनवरी
फरवरीद्विजेस्पति संकष्टी16 फरवरी
मार्चभालचंद्र संकष्टी15 मार्च
अप्रैलविकट संकष्टी14 अप्रैल
मईएकदंत संकष्टी13 मई
जूनविभुवन संकष्टी (अधिक मास)12 जून
जुलाईकृष्ण पिंगल संकष्टी11 जुलाई
अगस्तगजानन संकष्टी9 अगस्त
सितंबरहेरंब संकष्टी8 सितंबर
अक्टूबरविघ्नराज संकष्टी7 अक्टूबर
नवंबरवक्रतुंड संकष्टी6 नवंबर
दिसंबरलंबोदर संकष्टी5 दिसंबर
सबसे महान: सकट चौथ (जनवरी) — साल भर में सबसे पुण्यदायी। यदि संकष्टी मंगलवार को पड़े तो वह अंगारक संकष्टी बन जाती है — साल में सिर्फ 2-4 बार आती है, कभी miss न करें।

हर महीने गणेश जी का अलग स्वरूप

चैत्र
विकट गणपति

संसार के संकटों का हरण

वैशाख
एकदंत गणपति

बुद्धि और ज्ञान

ज्येष्ठ
कृष्ण पिंगल गणपति

धन और समृद्धि

आषाढ़
गजानन गणपति

बल और पराक्रम

श्रावण
हेरंब गणपति

माता-पिता का आशीर्वाद

भाद्रपद
विघ्नराज गणपति

विघ्न नाश

अश्विन
वक्रतुंड गणपति

न्याय और धर्म

कार्तिक
लंबोदर गणपति

ऋण मुक्ति, शांति

उपवास नियम

व्रत कब शुरू होता है? त्रयोदशी की रात (एक दिन पहले) सात्विक भोजन के बाद।

दिन भर: निर्जला या फलाहार — अन्न नहीं। सिर्फ फल, दूध, साबूदाना, मेवे।

🌙 बिना चंद्र दर्शन के व्रत पूरा नहीं होता। चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को अर्घ्य दें, फिर व्रत तोड़ें। अपने शहर का moonrise time पंचांग में ज़रूर देखें।

पूजा विधि — चरण-दर-चरण

  1. स्नान और साफ वस्त्र। मंदिर गंगाजल से शुद्ध करें।
  2. घी या तेल का दीया और अगरबत्ती जलाएँ
  3. दूर्वा घास (दुब) अर्पित करें — गणेश जी का सबसे प्रिय। 21 या 5 दूर्वा अवश्य अर्पित करें
  4. मोदक या मोतीचूर लड्डू प्रसाद में रखें
  5. सिन्दूर, अक्षत और फूल अर्पित करें
  6. मंत्र जाप: "ॐ गं गणपतये नमः" — 108 बार
  7. "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा"
  8. संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़ें या सुनें
  9. गणेश जी की आरती करें
  10. चंद्रोदय के बाद: अर्घ्य दें, चंद्र मंत्र पढ़ें, फिर व्रत तोड़ें

🔴 अंगारक संकष्टी — क्यों है इतनी खास?

जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़े, वह अंगारक संकष्टी बन जाती है — मंगल ग्रह की ऊर्जा से प्रवर्धित। साल में सिर्फ 2-4 बार आती है।

इस दिन: लाल फूल अर्पित करें, लाल कपड़े का आसन रखें, लाल तिलक लगाएँ। परिणाम जल्दी मिलता है — खासकर career, नौकरी और स्वास्थ्य के लिए।

संकष्टी चतुर्थी के फायदे

  • विघ्न नाश — गणेश विघ्नहर्ता हैं — जो भी रुकावट है, वह हटाते हैं
  • मनोकामना पूर्ति — सच्ची नीयत से माँगी इच्छा पूरी होती है
  • संतान प्राप्ति — जो दम्पत्ति संतान चाहते हैं, यह व्रत करते हैं
  • कार्य सिद्धि — कोई भी काम जो अटका हो, खुलने लगता है
  • गृह शांति — परिवार में कलेश खत्म होता है
  • मानसिक स्पष्टता — गणेश बुद्धि के देवता हैं — छात्र और professionals दोनों लाभान्वित होते हैं

घर के मंदिर में गणेश जी की पूजा के लिए

  • पीतल की गणेश मूर्ति — घर के प्रवेश द्वार या मंदिर में सही दिशा में रखें
  • दूर्वा घास — ताज़ी या सूखी — गणेश पूजा में लाज़मी
  • पूजा घंटी — आरती में घंटी की आवाज़ गणेश जी को जागृत करती है
  • सिन्दूर और अक्षत
  • मोदक — गणेश जी का सबसे प्रिय प्रसाद

संकष्टी की कथा: राजा चंद्रसेन के दरबार में एक गरीब बालक अपनी माँ के साथ आया। उसने देखा राजा शिव की पूजा कर रहा है — बालक ने भी बैठकर गणेश जी की पूजा शुरू कर दी।

राजा ने उसे दरबार से निकाला। बालक ने परवाह नहीं की और पूरी भक्ति से पूजा जारी रखी। गणेश जी प्रसन्न हुए और उस गरीब बालक को राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर बिठाया गया।

गणेश जी भाव देखते हैं — चाहे वह राजा हो या गरीब बालक।

"पहले गणेश जी को याद करो — प्रथमम् गणनाथं स्मरेत्।"

संकष्टी चतुर्थी एक मासिक विश्वास है — कि जो भी रास्ते में रुकावट है, उनकी कृपा से दूर हो सकती है।

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